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Tuesday, July 15, 2008

... तो टीवी देखना इस्लाम के खिलाफ़ है! (Ooh...Watching TV is against the Islam!)

सनिचर 12 जुलाई की सुबह मेरठ के लावड़ कस्‍बे के पास दौराला रोड पर लोगों का हुजूम लगा था। जिसे देखिए वही अपनी गाड़ी लगाकर तमाशा देख रहा था। समझना चाह रहा था कि आखिर यह हुआ क्‍या। क्‍या हो रहा है। ... लोग अपने घरों से टीवी उठाकर ला रहे हैं और सड़क पर पटक रहे हैं। कोई वीसीडी प्‍लेयर लिए चला आ रहा है तो किसी के हाथ में टेपरिकार्डर। ... टीवी, टेपरिकार्डर, सीडी और सीडी प्‍लेयर ... जिस घर में जो था ... सब तोड़ दिए गए। कहीं किसी सामान की साँस न चलती रहे, इसलिए इतिमिनान के लिए मलबे में आग लगा दी गई। राख... सब कुछ खाक।

पर यह हुआ क्‍यों।

इन सबकी अगुआई कर रहे नेता जी कहना था कि 'ये सारी चीज़ें अश्‍लीलता और जुर्म को बढ़ावा देने का सबब हैं। नौजवान अपनी जिम्‍मेदारियों से दूर हो रहे हैं।' और तो और उन्‍होंने एक और लुकमा जोड़ दिया... 'यह सारी चीज़ें इस्‍लाम विरोधी हैं। ऐसा इस्‍लाम के विद्वानों ने बताया है। मुसलमानों के लिए इन्‍हें देखना हराम है। इनकी अपील है कि मुसलमान टीवी... सीडी प्‍लेयर इस्तेमाल न करें और कर रहे हैं तो इनकी तरह घर से इन्‍हें बेदख़ल कर दे।'

इस्‍लाम के पहले के युग को जाहिलियत का युग कहा जाता है। ऐसा समझा जाता है कि इस्‍लाम ने अपने समय की ढेर सारी कुरीतियों को कुसंस्‍कार को दूर करने और कई पर पाबंदी लगाने का काम किया। जैसे बेटी को मारने की प्रथा पर पाबंदी... औरतों को विरासत में हक दिलाना... वगैरह वगैरह। इस मामले में यह मज़हब यथास्थिति का हिमायती नहीं रहा और अपने समय से आगे रहा। तो अब ज़रा सोचिए, चौदह सौ साल पहले बहुत कुछ ऐसा नहीं था, जो आज है। तो इनके होने और इस्‍तेमाल के बारे में मज़हब का नज़रिया क्‍या होगा या होना चाहिए, यह सबसे अहम सवाल है।

क्‍या जो भी चीज आधुनिक युग की देन है, उन सबको नकारा जाएगा। तब तो जंगल में पत्‍ते बटोरकर, पत्‍ते खाकर, पत्‍ते पहनकर, पत्‍तों पर सोकर ही जि़दगी बसर करनी चाहिए। यह मान लेना चाहिए कि इस्‍लाम की घड़ी की सुई 14 सौ साल पहले ही अटकी हुई है। फिर क्‍या टीवी और टेप रिकार्डर के साथ ही हर चीज, जिसका ईजाद इस्‍लाम के आने के बाद हुआ, उसके इस्‍तेमाल पर पाबंदी लगेगी। यह तो इस्‍लाम की सीख नहीं बताती है।

असल में दिक्‍कत यह है कि जाहिलियत का युग, इस्‍लाम के आने के बाद ख़त्‍म नहीं हुआ। ऐसे मामलों को देखकर तो यही लगता है। जाहिलियत का अँधेरा अब भी बरकरार है। ऐसे लोग और ऐसी घटनाओं, कुछ और करती हों या न करती हों, इस्‍लाम का मज़ाक जरूर बनाती हैं।

समझने की बात है कोई तकनीक या नया अविष्‍कार अपने आप में न तो अश्‍लील होता है और न मज़हब विरोधी। उसका इस्‍तेमाल कौन, किस मक़सद से कर रहा है, यह सबसे अहम है। अगर सास बहू के सीरियल हैं तो क्‍यू टीवी भी है। अगर दस बुरी फिल्‍में हैं तो कई अच्‍छी फिल्‍म भी। क्‍यों नहीं सबसे पहले क्‍यू टीवी और अल जज़ीरा चैनल बंद करवा दिए जाते हैं। हुजूर, ये सारे माध्‍यम सूचना और जानकारी पहुँचाने के औजार हैं। आज के वक्‍त में इनकी वैसी ही जरूरत है, जैसे दाना-पानी की। यह ऑ‍क्‍सीजन का काम करते हैं। जम्‍हूरियत की जरूरत हैं।

इसलिए, नौजवान अश्‍लीलता के आगोश में डूबेगा या नहीं, जुर्म के गलियारे में फँसेगा या नहीं... यह तो बाद की बात है, पर इतना तो तय है कि वह दुनिया के बेशुमार इल्‍म और जानकारी की दौलत से महरूम जरूर रह जाएगा। और आज के वक्‍त में यही जाहिलियत है। इसका अँधेरा कैसे मिटेगा।

Friday, July 13, 2007

दुनिया को तुरंत ब‍तायें अपनी पोस्‍ट

आपने पोस्‍ट लिखी मनन और जतन से और कोई उसे देख न पाये, तो कैसा लगता है। कई बार ऐसा भी होता है कि पोस्‍ट लिखने के घंटों बाद तक आपकी पोस्‍ट सार्वजनिक स्‍पेस यानी फीड एग्रीगेटर के ज़रिये नहीं दिखती। कई बार वक्‍त बीतने के साथ धड़कन भी बढ़ती जाती है। कई दोस्‍तों को तो अपनी पुरानी पोस्ट सिर्फ इसलिए दोबार पोस्‍ट करनी पड़ी है कि उनकी पोस्‍ट सार्वजनिक स्‍पेस में नहीं आ पायी। एक एग्रीगेटर के तकनीकी कर्ताधर्ता इस बात से बड़े परेशान भी हैं कि लोगों की पोस्‍ट सार्वजनिक स्‍पेस में नहीं आती तो ब्‍लॉगर ई मेल की झड़ी लगा देते हैं।
अब इस झंझट से छुटकारा का दावा लेकर नया ब्‍लॉग एग्रीगेटर ब्‍लॉगवाणी आया है। ब्‍लागवाणी के मुताबिक, आप अपने ब्लाग पर इसका लिंक लगाकर अपनी प्रविष्टियां ब्लागवाणी पर तुरंत दिखा सकते हैं। यह काम चंद मिनटों का है। आप यहां जायें। यहां आपको संदेश मिलेगा कि अपने ब्‍लाग पर ब्‍लागवाणी का लिंक कैसे बनायें। आपको करना सिर्फ इतना है कि वहां मौजूद 'सबमिट' बटन के साथ दिये गये बॉक्‍स में अपने ब्‍लॉग का पता टाईप करें।

जैसे http://www.dhaiakhar.blog.spot.com/ इसके बाद ब्‍लागवाणी खास आपके ब्‍लाग के लिए एक एचटीएमएल लिंक जनरेट कर देगा। जो इस प्रकार होगा-

आप इस लिंक अपने ब्‍लाग के एचटीएमएल सेटिंग में जाकर डाल दें। तो आपके ब्‍लाग पर इस तरह का एक लोगो दिखने लगेगा।

बकौल ब्‍लॉगवाणी, 'आपके ब्लागवाणी लिंक में कुछ खास है. आप जब भी नयी पोस्ट लिखें अपने ब्लागवाणी वाले लिंक पर क्लिक करें, ब्लागवाणी फौरन आपकी पोस्ट उठा लेगा. मतलब जैसे ही पोस्ट लिखेंगे, वो ब्लागवाणी पर दिखेगी. अब इंतज़ार खत्म!'
यानी पोस्‍ट लिखें। पोस्‍ट करें और अपने ब्‍लाग पर लगे ब्‍लागवाणी लोगों पर क्लिक करें... और पूरी दुनिया के सामने तुरंत होगी आपकी पोस्‍ट। है न् अच्‍छी चीज़। तो आप आज़मायें।

अंत में: मैंने आज़मा लिया। इस पोस्‍ट के डालने के बाद मैं ब्‍लागवाणी पर गया, वहां यह पोस्‍ट नहीं थी। जैसे ही मैंने अपने ब्‍लाग से ब्‍लागवाणी का लोगो दबाया, पोस्‍ट दिखने लगी। धन्‍यवाद।

Tuesday, July 3, 2007

कोई बताये फोटो कैसे गायब हो गये

दोस्तो
कल 02 जुलाई को मैंने 12 फोटो के साथ एक "गुजराती" की तलाश एक पोस्ट डाली थी। आज सुबह तक उस पोस्ट की सभी फोटो दिख रही थी। दोपहर बाद एकाएक दो फोटो को छोड़कर सारी फोटो गायब हो गयीं। मुझे लगा मेरे ब्राउज़र में कुछ प्राब्लम होगी। रात में फिर फोटो नहीं दिखीं। मैंने ब्राउज़र बदला, वहां भी यही हाल था। तभी मेरे एक दोस्त ने बताया कि उन्हें भी फोटो नहीं दिख रही है। फिर मैंने दोबारा सारी फोटो अपलोड की।
तकनीक के माहिर दोस्तो से मेरी गुज़ारिश है कि कृपया यह बताने का कष्ट करे कि आखिर यह कैसे हुआ? क्या सम्भावित वजह हो सकती है? क्या सावधानी बरतनी चाहिए कि आगे किसी पाठक को इस परेशानी से दोचार न होना पड़े? जवाब का इंतजार रहेगा।
नासिरूद़दीन

Monday, June 11, 2007

भोमियो की मदद करें

भोमियो पर उर्दू से हिन्दी लिप्यंतरण की प्रक्रिया चल रही हैउस प्रक्रिया में भोमियो को आपकी मदद की जरूरत हैभोमियो पर कुछ दिनों पहले उर्दू से हिन्दी लिप्यंतरण की पहल शुरू हुई हैउर्दू के शब्द विन्यास को देखते हुए यह टिल काम था फिर भी जिस मेहनत से भोमियो ने यह काम किया, वह काबिले तारीफ हैइस शुरुआती कोशिश में जाहिर है, ढेर सारी चीजें छूट गयी हैं
भोमियो ने हार मानते हुए, उसे और बेहतर करने की कोशिश शुरू कर दी है। इसमें उन्हें उन सब लोगों के साथ की जरूरत है, जो उर्दू-हिन्दी पढ और समझ लेते हैंभोमियो ने अपनी वेबसाइट पर उर्दू अल्फाज की एक लम्बी फेहरिस्त दी है साथ में उसका हिन्दी रूप, जो भोमियो ने लिप्यंतरित किया है, उसकी फेहरिस्त भी साथ में दी गयी हैआपको यह बताना कि यह लिप्यंतरण कैसा है यानी ठीक है ...गलत है... या सही क्या होगाउसी आधार पर नया कैरेक्टर मैप तैयार करने की कोशिश होगी। उर्दू में एक बडी दिक्कत मात्राओं को लेकर है। उर्दू में मात्राओं को लिखने की परम्परा खत्म सी हो गयी है। इसलिए शब्द 'इस' है या 'उस' या फिर किसी शब्द में 'खु' है या 'खू' यह अंदाजा लगाना पाठक की अपनी जानकारी पर निर्भर रहता है। और जब पाठक मशीन हो तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वह जो पढेगा, उसके लिए कितनी मुश्किल होगी। यही नहीं कई शब्दों के साथ भी दिक्कत है। हिन्दी में उन सब के लिए एक ही अक्षर इस्तेमाल होगा। इन जटिलताओं के बावजूद यह काम हो रहा है, इसकी जितनी तारीफ की जाये कम है।
अभय भाई जैसे कई दोस्त हैं, जिनका उर्दू, हिन्दी पर अच्छा अधिकार हैउन दोस्तों को चाहिए कि अपने व्यस्त कार्यक्रम में से थोडा वक्त निकालकर इसे बेहतर करने में भोमियो की मदद करें यहां क्लिक करें। यह प्रसव पीडा हैअगर हम भोमियो की मदद को आगे आयें तो पीडा सहने में उन्हें आसानी होगी