शर्म हमें शायद अब भी नहीं आएगी (Flood in Bihar-5)
एक बार फिर हाजि़र हैं, नागेन्द्र अपनी पैनी निगाह और मामूली से अल्फाज के साथ, मामूली से लोगों की बेहाल जिंदगी बयान करने के लिए। ऐसी बेदर्दी, ऐसी हैवानियत... उफ्फ... संकट की घड़ी में ऐसा सुलूक... सच है, शर्म वाकई में मगर हमें/इनको नहीं आएगी। इन्हें आप किन अल्फाज़ से नवाज़ेंगे। इनके लिए आप किस सजा की तजवीज करेंगे। ये शब्दों से ऊपर हैं और सजा तो शायद इनके लिए है ही नहीं। ढाई आखर के पाठकों के लिए हिन्दुस्तान, भागलपुर के स्थानीय सम्पादक नागेन्द्र (Nagendra) की यह रिपोर्ट। हिन्दुस्तान से शुक्रिया के साथ। शर्म हमें शायद अब भी नहीं आएगी बाढ़ग्रस्त इलाकों की चिकित्सा व्यवस्था में छेद ही छेद हैं सुपौल और सहरसा से लौटकर नागेन्द्र बिहार के बाढ़ग्रस्त इलाकों में सरकारी चिकित्सा इंतजामों की बार-बार ढँकी जा रही परत खोलने के लिए त्रिवेणीगंज की यह घटना पर्याप्त है। पिछले पाँच दिनों में वहाँ जो कुछ हुआ उससे आक्रांत लोग अब रेफरल अस्पताल छोड़ कर भागने लगे हैं। लिखते हुए भी शर्म आती है ले...