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गुलजार की नज्‍म 'सूर्य ग्रहण'

... तो पशु-पक्षियों से कुछ सीखते क्‍यों नहीं

तीस साल बाद स्याह यादें

लौटना मार्क्‍स का (Lautna Marx Ka)

अजगर तो छदम धर्मनिरपेक्षतावादी निकला!

आतंकवाद का हिन्‍दुत्‍ववादी (हिन्‍दू नहीं) चेहरा (Hindutava terror)

भारतीय मुसलमानों का अलगाव (Alienation Of Indian Muslims)

एक पागल की डायरी का पुनर्पाठ

ईद के मौके पर गांधीगीरी

सवाल उठाने की इजाजत चाहता हूँ

शर्म हमें शायद अब भी नहीं आएगी (Flood in Bihar-5)

पेट में दाना नहीं, खाली है थाली (Flood in Bihar-4)