सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा (Saare Jahan Se Achha Hindostan Hamara)
'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' के बीच राष्ट्रीय गीत या गान का विवाद गाहे ब गाहे चलता रहता है। पिछले दिनों हिन्दी ब्लॉग की दुनिया में भी यह विवाद उठा था। मेरे ज़हन में अक्सर यह सवाल उठता है कि इस विवाद में 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' का नाम क्यों नहीं सुनाई देता। क्या कभी किसी ने यह सवाल नहीं उठाता कि यह तराना, कौमी तराना क्यों नहीं बना। क्या इसमें देशभक्ति की कमी थी। क्या इसमें लय ताल छंद कमजोर थे। क्या इसमें वह सलाहियत नहीं थी, जो इसके आगे 'राष्ट्रीय' गीत या गान लगवा सके। मैं इतिहास का विद्यार्थी नहीं हूँ, इसलिए मेरे पास इनके जवाब नहीं है। महज जिज्ञासु सवाल हैं। मैं कोई विवाद नहीं पैदा करना चाह रहा और न ही मेरी बेजा विवादों में दिलचस्पी है। न ही इस बात का अब कोई मतलब है। लेकिन यह बात आज क्यों फिर जहन में आई। आज सुबह उर्दू राष्ट्रीय सहारा में एक विज्ञापन छपा। इसके मुताबिक दस अगस्त यानी आज 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' ...