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साबरमती आश्रम में गाँधी जी के साथ एक दिन- 3 (One day in Sabarmati Ashram with Gandhi ji-3)

गाँधी जी के जीवन से जुड़ी तस्वीरों की तस्वीर की आखिरी कड़ी आज पेश है। उम्मीद है आपको पसंद आएगी। यह तस्वीर अपने आप में बहुत कुछ कहती हैं। खास आरके लक्ष्मण के कार्टून गाँधी जी की शख्सियत के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करते हैं।  यह भी देखें-  चित्रों में गाँधी जी -1  चित्रों में गाँधी जी-2

साबरमती आश्रम में गाँधी जी के साथ एक दिन- 2 (One day in Sabarmati Ashram with Gandhi ji-2)

गाँधी जी की जिंदगी की से जुड़ी तस्वीरों की दूसरी किस्त आज पेश है। तस्वीरों के बारे में जानने के लिए स्लाइड शो में बाएँ क्लिक करें। आप चाहें तो शो की गति अपने मुताबिक भी कर सकते हैं। गाँधी जी के शब्द '' मेरी लोकतंत्र की कल्पना ऐसी है कि उसमें कमजोर से कमजोर को उतना ही मौका मिलना चाहिए जितना कि समर्थ को।... आजकल सारे विश्व में कोई भी देश आश्रयदाता की नजर के बिना निर्बलों को देखता ही नहीं। ... पश्चिम के लोकतंत्र का जो स्वरूप आज विद्यमान है वह ... हलका फासीवाद जैसा है। ... सच्चा लो‍कतंत्र केन्द्र में बैठकर राज्य चलाने वाले बीस इन्सान नहीं चला सकते, वह तो प्रत्येक गाँव के हर इन्सान को चलाना पड़ेगा।''  '' (साबरमती) आश्रम जातिभेद नहीं मानता। आश्रम का मानना हे कि जातिभेद से हिन्दू धर्म को नुकसान हुआ है।'' पहली कड़ी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

साबरमती आश्रम में गाँधी जी के साथ एक दिन- 1 (One day in Sabarmati Ashram with Gandhi ji)

गाँधी जी की शहादत का यह साठवाँ साल है। मैं इस दौरान अहमदाबाद गया था और एक दिन साबरमती आश्रम में गुजारने का मौका मिला। गुजरात बापू का जन्म स्थान है। वही गुजरात, जहाँ बापू की अहिंसा को दरकिनार कर, पाँच साल पहले हिंसा का नंगा नाच देखने को मिला। बापू की याद की छाँव तले दिन गुजारना वाकई में एक यादगार तजुर्बा रहा। इस दौरान मैंने वहाँ की कुछ तस्वीर उतारने की कोशिश की। तस्वीरें आप सब से साझा कर रहा हूँ। ( तस्वीरों के बारे में जानने के लिए स्लाइड शो में बाएँ क्लिक करें। आप चाहें तो शो की गति अपने मुताबिक भी कर सकते हैं।)

पहचानिये, यही हैं हमलावर

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छह जुलाई को अहमदाबाद में अनहद द्वारा आयोजित छात्रों के महोत्‍सव में आये प्रोफेसर शिवजी पण्णिकर पर हमला और उसके बाद की गयी तोड़फोड़ की व्‍यापक निंदा हुई है। (हमले का आंखों का देखा हाल जानने के लिए यहां क्लिक करें।) हमले के बावजूद कार्यक्रम चलता रहा है और आज आठ जुलाई को सेंट जे़वियर सोशल सर्विस सोसायटी में इसका समापन समारोह है। इस बीच अभी तक पुलिस ने किसी भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया है। हमलावरों की फोटो भी (घेरे में) , पुलिस को मुहैया करायी गयी है। ढाई आखर के पाठक भी देखना चाहेंगे, कि आखिर ये 'वीर राष्‍ट्रवादी' कौन हैं। तो आप इन तस्‍वीरों पर निगाह दौड़ाइये लेकिन ये हमले भी इनके हौसले पस्‍त नहीं कर पाये 'राष्‍ट्रवादियों' के हमले से डिगे बिना अनहद का छात्र महोत्‍सव चलता रहा। हमले के बाद शुरू हुए महोत्‍सव में प्रोफेसर शिवजी पण्णिकर और अनहद की शबनम हाशमी। चित्र में पीछे छात्रों द्वारों बनाये गये डिजायन देखे जा सकते हैं। अमन,कौमी भाईचारा और इंसाफ के लिए आयोजित राष्‍ट्रीय छात्र महोत्‍सव के निमंत्रण और विद्यार्थियों द्वारा बनाये डिजायन की एक झलक।

एक "गुजराती" की तलाश

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यह अहमदाबाद की एक सड़क है। तेज फ़र्राटा वाली सड़क। बगल से गुज़रती रेल लाइन। पास में ही एक अंडर ब्रिज जिसमें महात्मा गांधी के जीवन की कई तस्वीर मिल जाती है। यह अहमदाबाद का शाही बाग़ का इलाका है। सामने लम्बी ऊंची इमारत। जहां रहते हैं शहर के ऊंचे लोग। जो बालकनी से शहर को देखते हैं, तो सब कुछ बौना नज़र आता है। आदमी से लेकर कार तक। इसी सड़क के ठीक सामने अहमदाबाद का पुलिस मुख्यालय है। गुजराती में इसके बोर्ड को पढ़ा जा सकता है। यहां पुलिस कमिशनर का दफ्तर है। पर मैं आपको यह सब क्यों बता रहा हूं। सड़क, इमारतें, पुलिस मुख्यालय, कमिश्नर... क्योंकि मुझे तलाश है एक 'गुजराती' की। जिसके बारे में अवामी शायर मख़्दूम मोहिउद्दीन ने कभी कहा था: यक़ी बख़्शा जुबां को जिसने पहले उसके जीने का वह पहला "नाखुदा" हिन्दुस्तानी के सफ़ीने का दिये रौशन किये मन्दिर में काबे के चिराग़ों से हज़ारों जन्नतें आबाद कर दीं दिल के दागों से वह मिरासे जहां वह ख़ुल्द का पैगाम आता है दकन की सर ज़मीं पर ज़िन्दगी का जाम आता है उसे बाबा-ए-उर्दू का नाम दिया गया। यानी उर्दू का पितामह। गांधी जी ने जिस हिन्दुस्तानी की ...

देखो रंग बदल रहा है आसमान का