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जनाब फिलिस्‍तीन का संगीत सुनेंगे (Music from Palestine)

फिलिस्‍तीन के संगीत से तो नफरत नहीं है। संगीत हर सीमाओं से परे होता है, ऐसा बड़े-बुजुर्ग कहते हैं। इसलिए हमने सोचा क्‍यों न फिलिस्‍तीन का आधुनिक संगीत ही दोस्‍तो के लिए पेश किया जाए। हमने डायरी के चंद पन्‍ने पेश किए। कविताएँ पेश की- पर कुछ दोस्‍तो को यह पसंद नहीं आया। जाहिर है सबको न तो खुश किया जा सकता है और न ही हम यहाँ सबको खुश करने के लिए आए हैं। शायद इस कला में हम पारंगत भी नहीं हैं। इसलिए हम तो वह बात कहने की कोशिश करते हैं, जो हमें जरूरी लगता है। फिलिस्‍तीन के बारे में हम क्‍यों पोस्‍ट कर रहे हैं, इसको लेकर कई दोस्‍तो में बड़ी बेचैनी है। इस बेचैनी पर बाद में बात करेंगे तब तक यह संगीत सुनें। इस संगीत को तैयार किया है चेकप्‍वाइंट 303 (Checkpopint 303)  नाम के समूह ने। यह फिलिस्‍तीन के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में आवाज के टुकड़ों की संगीतमय प्रस्‍तुति है। इसे किसी बैंड ने तैयार नहीं किया है। मिडिल ईस्‍ट के लोगों की जिंदगी में जो संगीत है, उसमें गोलियों की आवाज, चीख पुकार शामिल हैं। हर रोज इ...

फि़लिस्‍तीन का एक आशिक़ (Lover From Palestine)

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  महमूद दरवेश (Mahmoud या Mahmood Darwish) फिलिस्‍तीन के मशहूर कवि हैं। दुनिया के बड़े साहित्‍यकारों में उनका शुमार होता है। अपने वतन फिलिस्‍तीन के लिए जबरदस्‍त बेचैनी उनकी शायरी में साफ तौर पर देखी जा सकती है। फिलिस्‍तीन को समझने का एक बड़ा जरिया दरवेश की कविताएँ हैं। ढाई आखर पर इससे पहले भी हमने उनकी कविताएँ पोस्‍ट की थीं। आज चंद और रचनाएँ पेश हैं। इसे अंग्रेजी से हिन्‍दुस्‍तानी में पेश किया है साहित्‍यकार/ नाटककार ख़ुर्शीद अनवर ने।   फि़लिस्‍तीन का एक आशिक़ तेरी आँखें कि उतरता कोई नश्‍तर दिल में दर्द महसूस करूँ, या कि फि़दा हो जाऊँ तेज़ झोंकों में हूँ फा़नूस इनका   रात को चीर दे और दर्द को गहरा कर दे ऐसे पेवस्‍त करो आँखों को सीने में मेरे तेरी आँखों से मिले ज़ख्‍़म यूँ चमकें जैसे आज के घोर अँधेरों में रोशनी की किरण कल के ख्‍़वाबों को भी रोशन कर दे और मेरी रूह पे भी छा जाए। और जिस दम मेरी नज़रों से मिले तेरी नज़र यह भी न याद रहे हम कभी साथ भी थे, एक ही थ...

गाजा की औरतों का संदेसा

दुनिया भर की सारी औरतों के लिए मुहब्बत और एहतराम के साथ मैं गाजा यह खास संदेसा भेज रही हूँ. यहाँ के मुतानिक ११ बजे, यानी अभी से कुछ घंटे बाद गाजा की कई औरतीं और बच्चे इस खास दिन को मनाने अनाम फौजी के चौक पर इकठ्ठा होंगे . वे अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी और खास कर औरतों से यह अपील करेंगे कि वे फिलस्तीन के बच्चों और औरतों पर रोज़-रोज़ ढाए जा रहे जुर्मों के बारे में इस खास रोज़ खामोश न रहें. हम पूरी दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि दीवारों से घेर कर या हमारे ख़िलाफ़ लगातार मिलिटरी ज़ुल्म से इसराइल महफूज़ नहीं होगा. सबके लिए सुरक्षा इंसाफ कि बुनियाद पर गढ़ी गई शान्ति से ही हो सकती है और इन्साफ का मतलब है फिलिस्तेनी लोगों के इज्ज़त और बराबरी के साथ रहने के हक को कबूल किया जाना..... गाज़ा से मैं आप सब से अपने लिए समर्थन और सहारा मांगती हूँ. अपनी सरकारों से कहिए कि वे गाजा पर कसी गई इस गिरफ्त को फौरन ख़त्म करने को कदम उठाएं. गाजा में हमारे पास इतने ख़ूबसूरत फूल हैं कि हम उन्हें आपको भेज सकते तो दिली खुशी होती लेकिन सीमाएं सील कर दी गई है और इस वजह से हम अपने फूल आप तक भेज नही सकते!!!! इस ...

...तो तुम्हें गैस चैंबर में अपनी माँ की याद आती

फिलस्तीन के कवि महमूद दरवेश (Mahmood Darvish) की चंद रचनाएँ पेश हैं। यह रचना मुश्किल हालात का आईना हैं। फिलस्तीनी लोगों की जिंदगी को समझने को इन कविताओं से बेहतर और कोई जरिया नहीं हो सकता। ... एक कातिल को अगर तुमने अपन शिकार के चहरे पर ध्यान दिया होता और फिर ज़रा सोचा होता तो तुम्हें गैस चैंबर में अपनी माँ की याद आती, तुम बंदूक के तर्क से आज़ाद हो गए होते और तुमने बदल दिया होता अपना ख़याल: यह अपनी पहचान फिर से हासिल करने का तरीका नहीं है. हमारा नुकसान हर रोज़ दो से आठ के बीच शहीद और दस जख्मी और बीस मकान और पचास जैतून के दरख्त... इसमें जोड़ दें वह गड़बड़ी जो संरचना में होती है शायरी , नाटक और अधूरे कैनवास के . ... एक औरत ने बादल को कहा : मेरे महबूब को ढाप लो क्योंकि मेरे कपड़े तर हैं उसके लहू से. ... गर तुम बारिश नहीं हो सकते तो पेड़ बन जाओ उर्वरता से भरपूर पेड़ अगर तुम पेड़ नहीं बन सकते , मेरी जान पत्थर बन जाओ , नमी से पुर , पत्थर अगर तुम पत्थर नहीं बन सकते मेरी जान चाँद बन जाओ, चाँद ( ऐसा कहा एक औरत ने अपने बेटे को दफ्न करते वक्त) ... वह अपने कातिल को सीने से लगाता है. वह अपने क...

एक गुजारिश गाजा की तरफ से (Ek Guzaarish Gaza ki Taraf se)

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मेरा यक़ीन है कि मैं सर्वशक्तिमान ख़ुदा की इच्छा के मुताबिक काम कर रहा हू। यहूदियों के ख़िलाफ़ अपनी हिफाज़त करके मैं ख़ुदा के तरफ से लड़ रहा हू: अडोल्फ़ हिटलर, 1924 हज़ार गैर यहूदी जिंदगियाँ एक यहूदी के नाखून के बराबर भी नहीं हैं: दोव लिओर, किरयात अरबा के रब्बी हम फिलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ और भी भयानक हौलोकास्ट करेंगे: मातन विनी, इसराइल का उप रक्षामंत्री, 1 मार्च 2008 गाजा का दम घुट रहा है। हिटलर के होलोकास्ट के शिकार रह चुके यहूदियों के राष्ट्र का रक्षा मंत्री ख़ुद होलोकास्ट की धमकी दे रहा है। अमेरिका कहता है: हम इसराइल के आत्मरक्षा के अधिकार की हिमायत करते हैं। दुनिया के अख़बारों के लिए, समाचार तंत्र के लिए गाजा की मौतें ख़बर नहीं हैं। भारत के अखबारों के पन्ने पलट जाइए, इस्राइली हमले की ख़बर खोजने पर मिलेंगी। एक मुल्क डूब रहा है। एक पूरी कौम का गला घोंटा जा रहा है। हमारी सरकार हमलावर राज्य के साथ रिश्ते सुधार रही है। दुनिया के सारे लोकतंत्र खामोश देख रहे हैं। या नहीं देख रहे हैं। हम सब भी चुप हैं। फिलिस्तीन कभी था हमारे लिए, अब नहीं है। यह अपील है। अपनी आवाज़ फिलिस्तीन के लिए उठाने, इ...