मदरसे पर हमला, इमाम की पिटाई

पहले बसपा और अब सपा। श्रावस्ती में एक अंतधार्मिक शादी के बाद हुए हमले और यौन हिंसा में बसपा नेताओं का नाम आया था तो सिद्धार्थ नगर में एक मदरसे पर हमले में सपा नेता का नाम आ रहा है। उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियां अल्पसंख्यकों की कितनी हितैषी हैं, ये घटनाएं एक झलक भर हैं।

सिद्घार्थ नगर के अटवा तहसील के मौजा हरिबंधन पुर में कल 7 अगस्त को बन रहे मदरसे तालीमुल कुरान की दीवार और अन्य  हिस्से को गांव के ही दूसरे फिरके के लोगों ने हमला कर तोड़ दिया। मदरसे के कर्ताधर्ता की पिटाई की। बताया जा रहा है कि हमलावरों का नेतृत्व समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय उर्फ झिंकू कर रहा था।

गांव की आबादी लगभग 700 है, जिसमें पाँच छह फीसदी अल्पसंख्यक हैं। यह मदरसा 20 साल पुराना है और छप्पर के मकान में चल रहा था। अभी तक किसी विवाद की बात सामने नहीं आयी है और इसकी जमीन भी रजिस्टर्ड है। अभी इसे लोगों के चंदे से पक्का बनाने की कोशिश हो रही थी। अहले सुबह हुए हमले में वहां काम कर रहे मजदूर औरत-मर्द की पिटाई हुई। मदरसे के कर्ताधर्ता 85 साल के मोहम्मद सलीम भी पिटाई के शिकार हुए। गांव में इस तामीर को लेकर पहले ही तनाव की आशंका जाहिर की जा चुकी थी। पुलिस भी तैनात थी। ऐसा बताया जा रहा है कि हमलावरों ने पुलिस की राइफल छीन ली थी। और जब उन्होंने मदरसे की दीवार गिरा दी तब जाकर राइफल दी। मदरसे में लगे जंगले, दरवाज़े और दूसरे सामान भी हमलावर उखाड़ कर ले गये।

हमलावरों को रास्‍ते में अल्पसंख्यक समुदाय का जो भी मिला, उसकी पिटाई की। बाद में एसएसपी और डीएम घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। आज आठ अगस्त को डीआईजी ने भी गांव का जायजा लिया। इस मामले में सपा नेता अजय उर्फ झिंकू समेत 45 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। तीन दारोगा को निलम्बित कर दिया गया है। इस घटना के बाद गांव के 'शिव का चबूतरा' को भी क्षतिग्रस्त किये जाने की खबर है।

हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में हो रही, यह घटनाएं कहीं एक बड़े अनिष्ट की ओर तो इशारा नहीं कर रहे हैं। नागरिक समाज और राजनीतिक दलों का जो हाल है वह इससे लड़ पाने में फिलहाल सक्षम नहीं दिखते। इसलिए वक्त का तकाजा है कि जिन लोगों और संगठनों को देश की बहुलता और ना‍गरिक अधिकारों पर यकीन है, वे ऐसी ताकतों का सामना करने के लिए आगे आयें।

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